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मंगलवार, 12 नवंबर 2013

उसे नही मालूम

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मुझे  जीना नही आता ,
उसे मरना नही मालूम !
ज़रूरत हर किसी को है ,
मगर क्या है ,नहीं मालूम .
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                               तुम्हारी रोशनाई में /हमारी ,
                                  रोशनी  है गुम !
                                 तुम्हे अहसास तो होगा ,
                                 मगर ,कब नही मालूम !
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उसे आकाश दिखता  है ,
और ये बारिश भी दिखती है !
कहाँ तक भीगा जाता है ,
यहाँ आंगन नही मालूम !
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बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

मुक्तक

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गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

sv gls


   
      महकता फूल हूँ / मुझको
    ख़ुदा के नाम में देखो !
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काव्य संग्रह --- ' धूप का कहा '
कविता --- 'बेटी '
----------------------------- डॉ . प्रार्थना पंडित









बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

DR. PRARTHANA PANDIT: 3 sher

DR. PRARTHANA PANDIT: 3 sher:


 आपकी बात मान ली मैंने
 जाने क्यू रार ठान ली मैंने ,
 सच ही कहना कहाँ मुनासिब था
 जाने कितनो की जान ली मैंने
, रात ने ढल के दोबारा ...