प्रकाशित काव्य संग्रह ---'धूप का कहा 'और ' एक गीत ज़िन्दगी ' से पाठक को जोड़े रखने की एक आत्मीय और ईमानदार कोशिश है / ये ब्लॉग --- :)
शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013
बुधवार, 11 दिसंबर 2013
मंगलवार, 12 नवंबर 2013
उसे नही मालूम
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मुझे जीना नही आता ,
उसे मरना नही मालूम !
ज़रूरत हर किसी को है ,
मगर क्या है ,नहीं मालूम .
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तुम्हारी रोशनाई में /हमारी ,
रोशनी है गुम !
तुम्हे अहसास तो होगा ,
मगर ,कब नही मालूम !
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उसे आकाश दिखता है ,
और ये बारिश भी दिखती है !
कहाँ तक भीगा जाता है ,
यहाँ आंगन नही मालूम !
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मुझे जीना नही आता ,
उसे मरना नही मालूम !
ज़रूरत हर किसी को है ,
मगर क्या है ,नहीं मालूम .
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तुम्हारी रोशनाई में /हमारी ,
रोशनी है गुम !
तुम्हे अहसास तो होगा ,
मगर ,कब नही मालूम !
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उसे आकाश दिखता है ,
और ये बारिश भी दिखती है !
कहाँ तक भीगा जाता है ,
यहाँ आंगन नही मालूम !
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बुधवार, 30 अक्टूबर 2013
मुक्तक
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गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013
बुधवार, 9 अक्टूबर 2013
DR. PRARTHANA PANDIT: 3 sher
DR. PRARTHANA PANDIT: 3 sher:
आपकी बात मान ली मैंने
जाने क्यू रार ठान ली मैंने ,
सच ही कहना कहाँ मुनासिब था
जाने कितनो की जान ली मैंने
, रात ने ढल के दोबारा ...
आपकी बात मान ली मैंने
जाने क्यू रार ठान ली मैंने ,
सच ही कहना कहाँ मुनासिब था
जाने कितनो की जान ली मैंने
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