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रविवार, 10 मार्च 2013

धूप का कहा : प्रकाशित काव्य संग्रह ; डॉ . प्रार्थना पंडित

मैं हूँ / अपना परिचय 

--                    महसूस कर मुझको
 ,
कहीं तेरी इबादत हूँ .
याद रख मुझको -
कहीं तेरी शराफत हूँ !
----------------
जिसे हर वक्त हम चाहें ,
कि, अपने घोसलों को दें !
मैं ऐसी स्नेह में लिपटी,
बड़ी  भोली हिफाज़त हूँ !
-------------------------------- डॉ. प्रार्थना पंडित